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जयपुर hellobikaner.in राज्य बीमा एवं  प्रावधायी निधि विभाग द्वारा राज्य कार्मिकों को बड़ी राहत प्रदान की है। अब कार्मिकों द्वारा ऑनलाइन प्रविष्ट की गयी राशि, बिना किसी की मन्जूरी की प्रतीक्षा किये,  सेवा अवधि के आधार पर निर्धारित सीमा तक, सीधे उनके बैंक खातोें में ट्रांसफर की जा सकेगी। अधिक राशि की आवश्यकता होने पर वर्तमान प्रावधानों के अनुसार पूर्ववत, निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आहरण प्राप्त करने की सुविधा यथावत रखते हुये उक्त नवीन सुविधा प्रदान की गयी है।

 

वित्त (बीमा) के संयुक्त शासन सचिव वेद प्रकाश गुप्ता ने बताया कि वर्तमान में कार्मिक को अपनी आवश्यकता के लिए जीपीएफ से राशि आहरित करने हेतु कारण बताते हुए और उसके सपोर्ट में वांछित दस्तावेज संलग्न कर अपने आहरण एवं वितरण अधिकारी को आवेदन करना होता है। आहरण एवं वितरण अधिकारी उक्त आवेदन पत्र को राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग के संबंधित जिला कार्यालय को अग्रेषित करता है। विभाग उक्त आवेदन पत्र पर नियमों में उल्लेखित सीमा तक आहरण राशि स्वीकृत कर बिल कोष कार्यालय में प्रस्तुत करता है, जिसके पश्चात् कोष कार्यालय के द्वारा उक्त राशि कर्मचारी के बैंक खाते में ईसीएस की जाती है। उक्त प्रक्रिया में अत्यधिक समय लग जाता है और कार्मिक को उसकी आवश्यकता के समय राशि प्राप्त नहीं होती।

 
 

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की वर्ष 2021-22 की बजट घोषणा के अनुसार विभिन्न विभागों की योजनाओं में कार्य प्रक्रियाओं के अधीन स्वीकृतियों एवं भुगतान प्रक्रियाओं को सरलीकृत एवं ऑनलाईन कर दस्तावेजों की अनिवार्यतः समाप्त करते हुए Deemed तथा Auto Approval  जैसे प्रावधान किया जाना था। इसकी अनुपालना में जीपीएफ की एक नयी प्रणाली विकसित की गयी है, जिसमें  आहरण के कारण बताने, आहरण एवं वितरण अधिकारी से आवेदन पत्र का अग्रेषण, भुगतान आदेश स्वीकृति (फ्लोट) जारी करने, बिल बना कर कोषालय प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को समाप्त कर सीधे बैंक खाते में राशि ट्रांसफर करने की व्यवस्था की गयी है।

 उक्त नवीन विकसित प्रणाली की टेस्टिंग हेतु सचिवालय यूनिट में 26 अगस्त से  पायलेट प्रोजेक्ट प्रारम्भ किया गया है।

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