बीकानेर hellobikaner.in श्री हनुमानजी के परम भक्त, गृृहस्थ संत, सेवा निवृृत स्कूल प्राचार्य, गुरुजी के नाम से विख्यात बुलाकी चंद सोनी (बुटण), मंगलवार केा देव लोक गमन कर गए। वे 80 वर्ष के थे। उनके लौकिक देह की अंत्येष्टि मंगलवार को ही मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज बगीची में वेदपाठी ब्राह्मणों की ओर से सस्वर किए गए पुरुष सूक्त के पाठ के साथ की गई। पुरुष सूक्त का पाठ उनके शिष्य मुरारी ठाकुर श्रीमाली व लालजी श्रीमाली ने किया।

उनकी अंतिम यात्रा में राजस्थान प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी, उप निवेशन उपायुक्त के.एल.सोनगरा, वरिष्ठ सांस्कृृतिक पत्रकार शिवकुमार सोनी सहदेव, पत्रकार राजेश ओझा, पत्रकार अश्वनी श्रीमाली सहित उनके अनेक शिष्य तथा स्वर्णकार समाज के गणमान्य लोग शामिल हुए तथा उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी। स्वर्गीय सोनी ने अनगिनत शिष्यों को हिन्दी, अंग्रेजी व गणित के साथ धर्म-आध्यात्म का ज्ञान सहज तरीके से दिया। स्वर्गीय सोनी पिछले एक सप्ताह से बीकानेर की पी.बी.एम.अस्पताल के आई.सी.यू. में मस्तिष्क से संबंधित बीमारी के कारण साधना के साथ स्वास्थ्य लाभ ले रहे थे।

 

बीकानेर के जवाहर मलजी सोनी के घर 22 अगस्त 1941 को जन्मे बुलाकी चंद सोनी बचपन से ही होनकार व मेघावी विद्यार्थी रहे है। इन्होंने देवीकुंड सागर, फोर्ट व सार्दुल उच्च माध्यमिक विद्यालय सहित विभिन्न विद्यालयों में शिक्षण कार्य किया। उन्होंने अनेक विद्यार्थियों को पढ़ाई के बेहतर तरीके बताए। इनके शिष्य वर्तमान में राजस्थान प्रशासनिक, पुलिस, शिक्षा, चिकित्सा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उच्च पदों पर कार्यरत है।

 

अपनी सुन्दर बेहतरीन चिंतन व सुन्दर लेखनी के कारण जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग में राष्ट्रीय व अन्य समारोह में इनको सम्मान के आमंत्रित किया जाता तथा लेखन कार्य करवाया जाता था। सोनी को जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग की ओर से अनेक बार सम्मानित किया गया।

 

पूनरासर, सालासर तथा मेेहंदीपुर बालाजी के धाम में जाकर नियमित भक्ति व आराधना करने वाले बुलाकीजी सोनी को धर्म, आध्यात्म तथा प्रभु, भक्ति की प्रेरणा अपने बड़े भ्राता गुरुजी चुन्नीलालजी सोनी से मिली। अपने भाई की भक्ति व आध्यात्मिक ज्ञान को अपनी बुद्धि व साधना से आगे बढ़ाया तथा हर पीड़ित के दुख व तकलीफ को दूर करने का निष्काम भाव से मार्ग दिखाया। मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज का होते हुए भी प्रभु भक्ति व वृृहद साधना, आराधना व भक्ति के कारण सभी समाज व तबके के लोगों से सम्मान प्राप्त किया। उनके लौकिक देह को छोड़ने पर श्रीमाली ब्राह्मण समाज के मुरारी ठाकुर, लालजी व मोदी समाज के विनय मोदी सहित अनेक शिष्यों ने मुंडन संस्कार करवाकर अपने गुरु के प्रति श्रद्धा व विश्वास प्रकट करते हुए श्रद्धांजलि दी।

 

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