Share

बीकानेर hellobikaner.com बीकानेर की शुष्क जलवायु और रेतीली मिट्टी अनेको औषधीय पादपों के लिये अति उपजाऊ है। हमारे यहां पर औषधीय पादप बिना किसी अतिरिक्त प्रयास और बहुत ही कम पानी मे होते है। जिनमे तुम्बा , अश्वगंधा , जैतून आदि पौधों का औषधीय महत्व बहुत ज्यादा है और बीकानेर में इनका उत्पादन गोचर भूमि पर सड़क के किनारे और खेतों में भी बहुतायत में सभी ने देखा और काम मे लिया होगा।

बीकानेर : रविवार को घर-घर होगा सर्वें, कोरोना पाॅजिटिव रोगी तलाशे जायेंगे

इन औषधीय पौधों के उत्पादन से किसानों की आय दोगुनी से भी ज्यादा हो जाएगी। वर्तमान कोरोना महामारी के दौर में 1 हेक्टेयर में 600किलो होने वाले अश्वगंधा की कीमत  बाजारो में 350 रुपये प्रति किलो के भाव से विक्री हो रही है।

इन सभी स्थानीय औषधीय पादपों के अनुसन्धान , विकास एवं किसानों को इनकी उन्नत तकनीकों के बारे में जानकारी देने के लिये भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के राष्ट्रीय पादप विकास बोर्ड (NMPB) एवं संबंधित  NGO द्वारा बीकानेर में काम किये जाएंगे।

कोविड काल मे प्रधानमंत्री द्वारा आत्मनिर्भर भारत अभियान में घोषित किये हर्बल खेती परियोजना में बीकानेर में गूगल कॉरिडोर स्थापित किया जाएगा । बीकानेर  के स्थानिक औसधीय पौधों को विकसित कर कम पानी और रेतीली भूमि पर किसानों के लिये ये कॉरिडोर एक नई अर्थव्यवस्था के मार्ग खोलेगा ।

About The Author

Share

You cannot copy content of this page