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अमृतसर hellobikaner.in साहित्य में अनुवाद का काम महत्त्वपूर्ण है क्योंकि की ये भाषाओं की दूरी को मिटाता है। ये विचार गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के वीसी जसपाल सिंह संधु ने विवि के पंजाबी अनुभाग में आयोजित राजस्थानी पंजाबी कहानी अनुवाद कार्यशाला में व्यक्त किये।

साहित्य अकादमी ने ये कार्यशाला विवि के पंजाबी विभाग के सहयोग से आयोजित की है।अनुवाद कार्यशाला के समापन बोलते हुए संधु ने कहा कि शिक्षा मातृ भाषा में देना ही व्यावहारिक है। अनुवाद के इस आयोजन को उन्होंने सार्थक कहा। पंजाबी विभाग के विभागाध्यक्ष मनजिंदर सिंह ने कार्यशाला की रिपोर्ट बताते हुए कहा कि अनुदित हुई राजस्थानी और पंजाबी कहानियों की पुस्तकें साहित्य अकादमी प्रकाशित करेगी।

साहित्यकार रवैल सिंह ने बताया कि पंजाबी साहित्य अन्य भाषाओं में भी जाये ये जरूरी है, तभी ये साहित्य अपने को समृद्ध भी कर सकेगा। कार्यशाला संयोजक मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘ ने साहित्य अकादमी की तरफ से अनुवाद के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अनुवाद उस प्रदेश की भाषा और संस्कृति ही नहीं अपितु मन और विचार तक को भी दूसरी भाषा में ले जाता है। इस कार्यशाला में राजस्थान से डॉ मंगत बादल, राजेन्द्र जोशी, संतोष चौधरी, सीमा भाटी और डॉ हरिमोहन सारस्वत ने भाग लिया। कार्यशाला में पंजाब से डॉ वनिता, रवैल सिंह, मनजीतसिंह, सरबजीत, देशराज ने भाग लिया। अकादमी के प्रतिनिधि ज्योतिकृष्ण वर्मा भी कार्यशाला में उपस्थित थे।

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