जमीन पर पैर न रखने वाला महाराष्ट्र का राजकीय पक्षी बीकानेर संभाग के इस जिले में प्रवास पर

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चूरू  hellobikaner.in  इस दुनिया में विभिन्न प्रजाति के पक्षी पाये जाते हैं, कुछ दिखने में बेहद खूबसूरत होते हैं तो वही किसी पक्षी की आवाज बेहद सुरीली होती है। लेकिन एक ऐसा पक्षी भी होता है जो अपनी पूरी जिंदगी में कभी भी पैर जमीन पर नहीं रखता है।

लोहिया कॉलेज के प्रोफेसर ऑर्निथोलोजिस्ट डॉ. के.सी. सोनी के मार्गदर्शन में चल रहे रविवारीय बर्ड वॉक की श्रृंखला के सप्तम सौपान के तहत इस रविवार को रतननगर से हुन्नतपुरा गांव तक व गांव के आसपास के क्षेत्र में पक्षियों का सर्वेक्षण किया गया जिसमें एक ऐसा पक्षी देखने को मिला जो अपनी पूरी जिंदगी में कभी भी पैर जमीन पर नहीं रखता है। इस पक्षी को हरियल पक्षी के नाम से जाना जाता है तथा इसे यलो फुटेड ग्रीन पीजन (पीले पैरों वाला कबूतर) भी कहा जाता है।

हुन्नतपुरा गांव, बिसाऊ पुलिस थाना के आसपास, अग्रसेन नगर चूरु के होलिका दहन पार्क व चूरु के आसपास के अन्य क्षेत्र जहां पर पीपल व बरगद के पेड़ है, वहां इस पक्षी को समूह में देखा गया है। मार्च से जून के मध्य उक्त क्षेत्रों में इस पीले पैरों वाले हरे कबूतर को देखा जा सकता है। मूल रूप से भारत में पाया जाने वाला यह पक्षी हरियल महाराष्ट्र का राजकीय पक्षी भी माना जाता है, जिसे मराठी भाषा में हरोली या हरियाल कहा जाता है। इस पक्षी का शारीरिक रंग हल्का हरा, स्लेटी या पीला होता है, जबकि इसके पैर गहरे पीले रंग के होते हैं। इस पक्षी का मिजाज दूसरे पक्षियों से बिल्कुल अलग होता है, जबकि रंगीन पंख और गोल मटोल आंखें इसकी खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं।

ऑर्निथोलोजिस्ट डॉ. के.सी. सोनी के अनुसार इस पक्षी के हरे रंग की वजह से ही हरियाल पक्षी नाम दिया गया है, जो पीपल या बरगद के पेड़ों पर ऊंचाई में घोंसला बनाकर रहना पसंद करता है। इस पक्षी की आंखें गहरे नीले रंग की होती है, जबकि यह अपने आहार में बेर, चिरौंजी, जामुन और पके हुए फल खाना पसंद करता है। डॉ. सोनी ने बताया कि आमतौर पर हरियाल पक्षी को देख पाना बहुत ही मुश्किल है, क्योंकि यह पक्षी स्वभाव से थोड़ा शर्मीला होता है। इसे इंसानों के करीब जाना पसंद नहीं है, और इस वजह से हरियाल पक्षी इंसानों की आहट सुनते ही चुप हो जाता है।

पर्यावरणविद् डॉ. रविकांत शर्मा ने बताया कि हरियाल पक्षी अपने जीवन काल में कभी भी जमीन पर पैर नहीं रखता है, जिसकी वजह इसका आलसी होना है। दरअसल हरियाल पक्षी ऐसे पेड़ पर घोंसला बनाता है, जहाँ इसकी खाने पीने की सारी जरूरतें पूरी हो जाती हैं। ऐसे में हरियाल पक्षी को कभी जमीन पर पैर रखने की जरूरत नहीं पड़ती है, यह पक्षी एक पेड़ से दूसरे पेड़ की टहनी पर बैठ जाता है और ऊंचाई से आसपास का नजारा देखता है। पूरी जिंदगी पेड़ पर बिताने की वजह से हरियाल पक्षी को बहुत ही आलसी समझा जाता है, जो काफी हद तक सच भी है।

आमतौर पर दूसरे पक्षी स्नान करने और मिट्टी से कीड़े मकौड़े खाने के लिए जमीन पर चहल कदमी करते हैं, लेकिन हरियाल पक्षी शुद्ध शाकाहारी होता है। इसलिए इसे जमीन या खेतों पर चलने की जरूरत नहीं होती है और यह ऊंचे पेड़ों पर अपना बसेरा बनाए रखता है। हरियाल पक्षी की प्रजाति में नर और मादा एक जैसे दिखाई देते हैं, जिनका जीवन काल 26 वर्ष तक होता है।

इस पक्षी की औसत शारीरिक लंबाई 3 सेंटीमीटर तक होती है, जिसका मांस बहुत ही मुलायम होता है। यही वजह है कि जंगलों में हरियाल पक्षी का शिकार बड़े पैमाने पर किया जाता है, जिसकी वजह से यह पक्षी इंसानों से दूर रहता है। डॉ. शर्मा के अनुसार अधिक शिकार के कारण इस पक्षी की संख्या तेजी से कम हो रही है। शिकारी की आहट होने पर हरियल पक्षी चोंच में तिनका लेकर जमीन पर गिर मरने का नाटक करता है और जैसे ही शिकारी का ध्यान हटता है उड़ जाता है। इस अवसर पर एडवोकेट संदीप शर्मा, युवा व्यवसाई पुनीत लाटा, पक्षी प्रेमी हेमंत सोनी, विजय डोभाल, चंद्र प्रभा शर्मा व अन्य प्रकृति प्रेमी उपस्थित रहे।

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